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यात्रा-वृत्तांत : नवगीत, इतिहास और आस्था का त्रिवेणी संगम - अशोक शर्मा ‘कटेठिया’

  यात्रा-वृत्तांत : नवगीत , इतिहास और आस्था का त्रिवेणी संगम -       अशोक शर्मा ‘ कटेठिया ’ साहित्य , इतिहास और लोकआस्था—ये तीनों भारतीय सांस्कृतिक चेतना के ऐसे आधारस्तंभ हैं , जिनके समन्वय से किसी भी अनुभव को बहुआयामी अर्थवत्ता प्राप्त होती है। जब ये तत्त्व किसी यात्रा के प्रसंग में एकत्र होते हैं , तब वह यात्रा मात्र भौगोलिक गमन न रहकर एक गहन सांस्कृतिक , बौद्धिक और आत्मानुभूतिक प्रक्रिया का रूप धारण कर लेती है। यात्रा-वृत्तांत की विधा इसी बहुस्तरीय अनुभव की सशक्त अभिव्यक्ति है , जिसमें दृश्य-परिदृश्य के साथ ऐतिहासिक बोध , सांस्कृतिक निरंतरता और आत्मानुभूति का सूक्ष्म अंतर्संबंध उद्घाटित होता है। इस दृष्टि से यात्रा-वृत्तांत केवल वर्णनात्मक साहित्य नहीं , बल्कि समय , समाज और संवेदना के अंतःसंवाद का जीवंत दस्तावेज भी है। एतदर्थ , मुजफ्फरपुर , वैशाली और सीतामढ़ी की सांस्कृतिक भूमि इस त्रिस्तरीय अनुभव के लिए अत्यंत उपयुक्त परिप्रेक्ष्य प्रदान करती है। मुजफ्फरपुर समकालीन हिंदी साहित्य , विशेषतः नवगीत परंपरा की सृजनात्मक ऊष्मा का प्रतिनिधि नगर है। यह नगर क...

डॉ. मधुसूदन साहा का दोहा–मुक्तक ‘पल भर का मृदु प्यार’ : परंपरा का नवोन्मेष - - अशोक शर्मा ‘कटेठिया’

  डॉ. मधुसूदन साहा का दोहा–मुक्तक ‘पल भर का मृदु प्यार ’ : परंपरा का नवोन्मेष -       अशोक शर्मा ‘कटेठिया ’ डॉ. मधुसूदन साहा (जन्म : 15 जुलाई , 1940 ; जन्मस्थल : धमसाई , चपरी , गोड्डा , झारखंड) समकालीन हिंदी साहित्य के उन बहुविध रचनाकारों में हैं , जिनकी साहित्यिक यात्रा सात दशकों से अधिक समय में विस्तृत होकर एक विशिष्ट सर्जनात्मक परंपरा का रूप ले चुकी है। ग्रामीण सांस्कृतिक परिवेश से निकलकर उन्होंने हिंदी साहित्य की मुख्यधारा में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। माता स्व. रामसखी देवी और पिता स्व. रामेश्वर प्रसाद साहा के संस्कारों से पोषित यह रचनात्मक चेतना जीवन–अनुभव और लोकसंवेदना से निरंतर अनुप्राणित रही है। उच्च शिक्षा के स्तर पर एम.ए. (हिन्दी) भागलपुर विश्वविद्यालय (बिहार) तथा पीएच.डी. संबलपुर विश्वविद्यालय (ओडिशा) से अर्जित कर उन्होंने अकादमिक गंभीरता को अपनी सृजनशीलता के साथ जोड़ा। ‘विद्यासागर’ (डी.लिट्) की उपाधि उनके दीर्घ साहित्य–साधना की औपचारिक मान्यता है। अध्यापन और राउरकेला इस्पात संयंत्र में राजभाषा अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए उन्हों...